अफ़ग़ानिस्तान में अस्थिरता के बीच काबुल क्यों पहुंचे पेशावर के अफ़ग़ान शरणार्थी

Hindi International

DMT : पेशावर : (25 अगस्त 2021) : – “मैंने बचपन से ही अमेरिका या यूरोपीय देश जाने का सपना देखा था, लेकिन कोई रास्ता नज़र नहीं आ रहा था.”

अचानक दाऊद (बदला हुआ नाम) को अपने एक दोस्त से एक ऐसी बात का पता चला कि उनकी आँखे चमक उठीं.

उन्हें ऐसा महसूस हुआ कि यही समय है, जब वह अपने सपने को पूरा कर सकते हैं.

इस ख़ुशी में दाऊद ने फ़ौरन इंतज़ाम किया और घर जाने के बजाय अपनी पत्नी और बच्चों को वर्कशॉप पर बुलाया और कार में बैठकर काबुल के लिए रवाना हो गए.

अमेरिका जाने का सपना

यह एक अफ़ग़ान शरणार्थी दाऊद (बदला हुआ नाम) की कहानी है, जिनका जन्म पेशावर के कच्चा गढ़ी कैंप में हुआ था. वह यहीं बड़े हुए और उन्होंने शादी भी यहीं की, लेकिन इसके बाद भी उन्हें अफ़ग़ान शरणार्थी कहा जाता है.

दाऊद इस कोशिश में थे कि ज़िंदगी बेहतर बनाने के लिए किसी तरह अमेरिका या किसी यूरोपीय देश में चले जाएं, लेकिन कोई रास्ता नज़र नहीं आ रहा था.

इस महीने अफ़ग़ानिस्तान पर तालिबान के क़ब्ज़े के बाद लोग बड़ी संख्या में काबुल एयरपोर्ट पर पहँचे और यह अफ़वाह फैल गई कि सभी लोग अमेरिका और यूरोपीय देशों में जा रहे हैं.

तालिबान के डर से काबुल एयरपोर्ट पहुँचे लोगों के वीडियो सोशल मीडिया पर वायरल हो रहे हैं. इससे यह धारणा फैल गई कि सभी लोग बिना किसी दस्तावेज़, पासपोर्ट या वीज़ा के अमेरिका और अन्य यूरोपीय देशों में जा रहे हैं.

अफ़ग़ानिस्तान से तो बड़ी संख्या में लोग वहां पहुँचे ही थे, लेकिन पाकिस्तान में मौजूद अफ़ग़ान शरणार्थी भी इस दौड़ में शामिल हो गए. स्थानीय लोगों के मुताबिक एक बड़ी संख्या में लोग काबुल पहुँच गए.

दाऊद भी उनमें से एक हैं और वह काबुल एयरपोर्ट के बाहर इस इंतज़ार में हैं कि कोई रास्ता खुले और वह अमेरिका चले जाएं.

पेशावर में जब दाऊद से मुलाक़ात होती तो वह अक्सर यही पूछते थे, ”मैं बिरतानिया (ब्रिटेन) या अमेरिका कैसे जा सकता हूं?” मैं उसे कोई जवाब नहीं दे पाता था.

वह कहते, “अच्छा, मेरा एक इंटरव्यू ही कर लो. विदेश में तो लोग मुझे देख लेंगे.” लेकिन मैं उनके लिए यह भी नहीं कर सका.

दुआ करना काम हो जाए’

कुछ दिन पहले जब मैं दाऊद से मिला तो वो दूर से ही देख कर मेरे पास आ गए और कहा, “अब मेरा समय आ गया है और मैं जल्द ही चला जाऊंगा.” मैं उनकी बात समझ नहीं पाया.

जब मुझे वर्कशॉप से फ़ोन आया तो पता चला कि दाऊद काबुल पहुँच चुके हैं और अब उन्हें एयरपोर्ट में दाख़िल नहीं होने दिया जा रहा है.

जब वर्कशॉप में उनके साथियों से पता किया तो उन्होंने बताया कि बस अचानक उन्होंने कहा, कि “मैं जा रहा हूं.”

यहां तक कि वह ख़ुद भी घर नहीं गए. “पत्नी और बच्चों को टैक्सी में बुलाया और उनके साथ बैठ कर काबुल चले गए.”

उन्होंने वर्कशॉप में अपनी दुकान एक सहकर्मी को सौंप दी और सभी से कहा, “दुआ करना मेरा काम हो जाए.”

काबुल एयरपोर्ट पर मौजूद दाऊद से टेलीफ़ोन के ज़रिए संपर्क हुआ, तो उन्होंने कहा कि यहां बहुत सारे लोग हैं, लेकिन किसी को एयरपोर्ट के अंदर जाने की इजाज़त नहीं है.

उन्होंने कहा, “यहां एक गेट पर तालिबान और दूसरे पर विदेशी सैनिक मौजूद हैं. किसी को अंदर जाने की इजाज़त नहीं है.”

दाऊद ने बताया कि वह पेशावर से आने वाले अकेले व्यक्ति नहीं हैं, बल्कि “सैकड़ों लोग पेशावर से यहां पहुँचे हैं, लेकिन उनमें से कोई भी सफल नहीं हुआ है.”

दाऊद ने सोमवार को बताया कि वह फिर से एयरपोर्ट की तरफ़ जा रहे हैं, लेकिन एयरपोर्ट के अंदर दाख़िल होना मुश्किल है. उनकी क़िस्मत बदले और वो किसी विमान में सवार होकर अमेरिका जा सकें, इसकी संभावना भी कम है.

दाऊद ने कहा, “उम्मीद पर दुनिया क़ायम है, लेकिन अब उम्मीदें दम तोड़ती जा रही हैं.”

बल्कि, अब तो उन्हें ऐसा लगता है कि वे पाकिस्तान वापस आ जाएंगे, क्योंकि “विदेश जाना अभी भी एक सपना बन कर रह जाएगा.”

‘अफ़ग़ान शरणार्थी कारोबार पर ध्यान दें’

पेशावर में अफ़ग़ान शरणार्थी संगठन के प्रमुख हाजी इस्मतुल्लाह तोख़ी इस स्थिति को चिंतित हैं.

उनका कहना है कि ऐसी अफ़वाह फैल रही है कि बड़ी संख्या में ऐसे लोग जा रहे हैं, जिनके यहां ठीक-ठाक कारोबार चल रहे हैं और वो करोबार छोड़ कर जा रहे हैं.

इस्मतुल्लाह ने कहा कि उनके लिए अपने चलते हुए कारोबार को छोड़कर विदेश जाना उचित नहीं है, बल्कि यहां अपने कारोबार को चमकाने की कोशिश करें.

दीवार फांदने की कोशिश

“अफ़ग़ान शरणार्थियों को यह ख़बर पता नहीं कहां से मिली है कि अमेरिका और यूरोपीय देश बीस-बीस हज़ार अफ़ग़ान शरणार्थियों को शरण देंगे? अब यहां रह रहे अफ़ग़ान शरणार्थियों ने कोई जानकारी हासिल नहीं की और काबुल एयरपोर्ट के लिए रवाना हो गए हैं.”

हाजी इस्मतुल्लाह ने कहा कि उनकी जानकारी के मुताबिक़, क़रीब तीन हज़ार अफ़ग़ान शरणार्थी दो दिन पहले तोरख़म सीमा पर पहुँचे थे, जबकि काबुल एयरपोर्ट पर लोग दीवारों को फांदने की भी कोशिश कर रहे थे.

उन्होंने कहा कि कुछ परिवार शायद इस आधार पर गए हैं, जिनके रिश्तेदार विदेश में रहते हैं और उन्होंने सरकार के माध्यम से ईमेल भेजकर कहा है कि उनके रिश्तेदारों को ख़तरा है. इसके आधार पर काबुल एयरपोर्ट पर उनके दस्तावेज़ों की जाँच करने के बाद, उन्हें निकालने की कार्रवाई की जा रही है.

“ऐसा बिलकुल नहीं है कि हर कोई जा रहा है, बल्कि जिनके पास दस्तावेज़ नहीं हैं, उन्हें क़तर और अन्य देशों से भी वापस भेज दिया जाता है.”

अफ़ग़ानिस्तान से लौटना भी मुश्किल

इस समय, ख़ैबर ज़िले के तोरख़म स्थान पर अफ़ग़ान-पाकिस्तान सीमा से केवल अफ़ग़ान नागरिकों को पाकिस्तान से अफ़ग़ानिस्तान जाने की इजाज़त है, जबकि अफ़ग़ानिस्तान से केवल पाकिस्तानी नागरिकों को आने की इजाज़त है.

सीमा पर तैनात अधिकारियों ने बताया कि अफ़ग़ानिस्तान में तालिबान के आने के कुछ दिनों बाद से वापस जाने वाले अफ़ग़ान शरणार्थियों की संख्या में वृद्धि हुई है.

उन्होंने कहा कि यह नहीं पता कि वापस जाने वालों का क्या उद्देश्य है, लेकिन लोगों की बातों से ऐसा लग रहा था कि शायद वो काबुल एयरपोर्ट जाना चाहते हैं. उन्होंने कहा, “ऐसा कोई मामला नहीं है कि लोगों को बिना दस्तावेज़ों के विदेश जाने की इजाज़त दी जा रही है.”

यहां अफ़ग़ान शरणार्थियों के बीच इस बात पर भी बहस चल रही है कि अगर वे जाने में नाकाम होते हैं, तो वापस कैसे लौटेंगे.

इस समय तोरख़म सीमा पर सख़्ती है और अफ़ग़ान नागरिकों को पाकिस्तान नहीं आने दिया जा रहा है और जो लोग चले गए हैं उनकी वापसी की संभावना भी सवालों के घेरे में है.

पेशावर में दाऊद के साथी भी चिंतित हैं.

उन्होंने कहा कि आख़िरी बार जब उन्होंने फ़ोन पर बात की थी तो दाऊद वापसी का इशारा कर रहे थे, लेकिन अब उनके लिए पेशावर लौटना मुश्किल होगा.

उसके एक साथी ने कहा कि दाऊद तो “अपने लौटने के तमाम रास्ते बंद करके गए हैं.”

Leave a Reply

Your email address will not be published.