अमेरिकी राजनयिक ने कहा, पुतिन नहीं मानेंगे हार लंबी लड़ाई के लिए रहें तैयार

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DMT : रूस  : (22 फ़रवरी 2023) : –

रूस और यूक्रेन के बीच जंग शुरू हुए एक साल पूरा होने जा रहा है लेकिन अब तक इसके ख़त्म होने के आसार नहीं दिख रहे हैं.

जहां एक ओर यूक्रेन के नेता वोलोदिमीर ज़ेलेंस्की पश्चिमी देशों से लगातार हथियार मांग रहे हैं. वहीं, दूसरी ओर रूस के राष्ट्रपति व्लादिमीर पुतिन के रुख में किसी तरह नरमी आने के संकेत नहीं मिल रहे हैं.

इस एक साल में दुनिया भर की अर्थव्यवस्थाओं को युद्ध की वजह से नुकसान उठाना पड़ा है.

ऐसे में सवाल उठता है कि आगे क्या होगा, ये युद्ध कब ख़त्म होगा और पुतिन कब और कहां रुकेंगे.

जॉन सुलिवन पिछले साल 24 फरवरी को यूक्रेन और रूस के बीच युद्ध शुरू होने से पहले तक मॉस्को में अमेरिकी राजदूत के पद पर तैनात थे.

वह उस अमेरिकी टीम में शीर्ष भूमिका में थे जो युद्ध टालने के लिए रूसी अधिकारियों से बात कर रही थी.

सुलिवन ने अपने अनुभव बीबीसी के साथ साझा करते हुए बताया है कि पुतिन इस युद्ध में आसानी से हार नहीं मानेंगे.

उन्होंने कहा, “वे रूस के लिए सुरक्षा से जुड़ी गारंटियां मांग रहे थे. लेकिन यूक्रेन की सुरक्षा सुनिश्चित करने के लिए रचनात्मक ढंग से बात नहीं कर रहे थे. वे इन मुद्दों पर अपने रुख से टस से मस नहीं हुए और ये सब किसी दिखावटी बातचीत जैसा था.”

इस इंटरव्यू के दौरान जॉन सुलिवन से पूछा गया कि क्या अमेरिका को संघर्ष ख़त्म करने के लिए बातचीत जारी रखने की दिशा में ज़्यादा कोशिशें करनी चाहिए.

इस सवाल पर उन्होंने कहा कि व्लादिमीर पुतिन “युद्ध शुरू होने से पहले भी बातचीत के लिए इच्छुक नहीं थे और वह अभी भी बातचीत में दिलचस्पी नहीं ले रहे हैं.”

अमेरिकी राष्ट्रपति जो बाइडन के प्रशासन ने बीते एक साल में यूक्रेन को अरबों डॉलर के हथियार देने के साथ ही अपना ध्यान रूस पर प्रतिबंध लगाने और यूक्रेन को हथियार दिलाने के लिए वैश्विक समर्थन जुटाने पर केंद्रित किया हुआ है.

वहीं, रूसी राष्ट्रपति व्लादिमीर पुतिन ने मंगलवार को दिए भाषण में अपने रुख को दोहराते हुए कहा कि ये युद्ध पश्चिमी देशों ने शुरू किया है और वे यूक्रेन का इस्तेमाल करके रूस को रणनीतिक रूप से चोट पहुंचाना चाहते हैं.

उन्होंने ये भी कहा कि इस युद्ध में यूक्रेन नहीं रूस अपने अस्तित्व की लड़ाई लड़ रहा है.

सुलिवन बताते हैं, “रूस को उसके स्व-घोषित विशेष सैन्य अभियान में भले ही कुछ असफलताएं मिली हों लेकिन इसके शुरुआती उद्देश्यों में कोई परिवर्तन नहीं हुआ है. ये उद्देश्य अभी भी यूक्रेन में नाज़ियों का ख़ात्मा और उसका असैन्यीकरण करना है.”

वह इसे यूक्रेन की सरकार गिराने और यूक्रेनी लोगों पर अपने नियंत्रण के रूप में देखते हैं.

ये उस विज़न का हिस्सा है जिसे उन्होंने सोवियत संघ के विघटन से अलग-थलग हुए लोगों को एक साथ लाने के लिए तैयार किया है.

पुतिन को ज़ेलेंस्की स्वीकार नहीं?

सुलिवन कहते हैं, “व्लादिमीर पुतिन यूक्रेन में लोकतांत्रिक ढंग से चुनी हुई सरकार नहीं रहने देंगे, विशेष रूप से जब उसका नेतृत्व वोलोदिमीर ज़ेलेंस्की कर रहे हों.”

इसके साथ ही वह बताते हैं कि रूसी राष्ट्रपति व्लादिमीर पुतिन यूक्रेन की मौजूदा ज़ेलेंस्की सरकार को अपने विज़न और रूस के लिए एक ख़तरे के रूप में देखते हैं.

वह कहते हैं, “पुतिन तब तक चैन से नहीं बैठेंगे जब तक ये सरकार बनी रहेगी क्योंकि वह इसे रूस और अपने उस विज़न के लिए भी ख़तरा मानते हैं जिसके ज़रिए वह व्यापक रूसी राज्य का गठन करने की कोशिश कर रहे हैं.”

ऐसे में सवाल ये उठता है कि पुतिन इस युद्ध को रोकने के लिए कैसे तैयार होंगे.

इसके जवाब में सुलिवन कहते हैं, “उन्हें ये स्वीकार कराना होगा कि वह ये युद्ध नहीं जीत सकते. वह तब तक अपनी ओर से पूरी ताक़त लगाते रहेंगे जब तक ये नहीं मान जाते कि वो किसी भी सूरत में ये युद्ध नहीं जीत सकते. मुझे नहीं पता कि युद्ध क्षेत्र में कितनी बड़ी शिकस्त मिलने के बाद वह ये बात स्वीकार करेंगे. लेकिन फिलहाल वह ये मानने के लिए तैयार नहीं हैं.”

पुतिन क्या सोच रहे हैं?

पूर्व अमेरिकी राजदूत सुलिवन बताते हैं, “रूसी नेता इस मसले को लंबे समय के नज़रिए से देख रहे हैं और जानते हैं कि उन्हें क्या हासिल करना है. इसलिए वो आसानी से सरेंडर नहीं करेंगे.”

सुलिवन मानते है कि यूक्रेनी भी ये नहीं चाहेंगे कि क़रीब साढ़े चार करोड़ की आबादी वाले स्लाव देश को अलग-थलग करने के मंसूबे में पुतिन को कामयाबी मिल जाए. वो इसे पुतिन की रणनीतिक हार साबित करने की कोशिश करते रहेंगे.

इन बातों के साथ ही सुलिवन कहते हैं, “यूक्रेनी लोग माफ करने और भूलने वाले नहीं हैं. अगर राष्ट्रपति ज़ेलेंस्की युद्ध समाप्त भी करना चाहें, क्षेत्रीय रियायतें देना चाहें या असल में आत्मसमर्पण करना चाहें तो भी यूक्रेन के लोग उन्हें ऐसा करने की अनुमति नहीं देंगे.”

इस तरह के सैन्य, राजनीतिक और वैचारिक गतिरोध की वजह से अमेरिका को एक लंबे युद्ध के लिए तैयार होना होगा.

राष्ट्रपति जो बाइडन ने इस युद्ध की पहली बरसी पर अचानक यूक्रेन की राजधानी कीएव पहुंचकर अमेरिका के समर्पण को रेखांकित किया है.

लेकिन सुलिवन ऐसा नहीं मानते हैं कि ये युद्ध इस साल ख़त्म हो जाएगा.

वे कहते हैं, “मुझे नहीं पता कि इसके आगे क्या होगा. लेकिन वे इसे तुरंत ख़त्म नहीं करना चाहते. वह हमेशा ये कहते रहते हैं कि इस विशेष सैन्य अभियान के लक्ष्य हासिल किए जाएंगे.”

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