मोदी पर डॉक्यूमेन्ट्री को यूट्यूब, ट्विटर पर ब्लॉक करने के आदेश, विपक्ष की तीखी प्रतिक्रिया

Hindi New Delhi

DMT : New Delhi : (23 जनवरी 2023) : – भारत के सूचना और प्रसारण मंत्रालय ने प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी पर बनाई गई बीबीसी की डॉक्टयूमेन्ट्री के पहले एपिसोड को यूट्यूब पर ब्लॉक करने का आदेश दिया है. साथ ही मंत्रालय ने वीडियो का लिंक शेयर करने वाले ट्विटर पोस्ट को भी हटाने के भी आदेश दिए हैं.

सूत्रों के हवाले से अख़बार लिखता है कि मंत्रालय के सचिव अपूर्व चंद्र ने आईटी नियम 2021 के तहत ये आदेश जारी किए हैं. और ट्विटर और यूट्यूब ने इस आदेश का पालन भी किया है.

सूत्रों का कहना है कि यूट्यूब से कहा गया है कि “अगर उसके प्लेटफॉर्म पर फिर से इस डॉक्यूमेन्ट्री को अपलोड करने की कोशिश की जाती है कि तो उसे ब्लॉक किया जाए. वहीं ट्विटर को इसके लिंक वाले ट्वीट्स की पहचान कर उन्हें हटाने को कहा गया है.”

वहीं इंडियन एक्सप्रेस ने अधिकारियों के हवाले से कहा है कि इस डॉक्यूमेंट्री में भारत की संप्रुभता और अखंडता को कमतर दिखाने की कोशिश की गई है और इसका विपरीत प्रभाव देखने को मिल सकता है. अधिकारियों ने यह भी कहा कि इस ‘डॉक्यूमेंट्री से दुनिया के दूसरे देशों के साथ दोस्ताना संबंध प्रभावित’ हो सकते हैं.

तृणमूल कांग्रेस के नेता डेरेक ओ’ब्रायन ने आरोप लगाया है कि बीबीसी की डॉक्टयूमेन्ट्री से जुड़े उनके एक ट्वीट को ट्विटर ने डिलीट कर दिया है.

इस बारे में ट्विटर पर उन्होंने लिखा, “ये सेन्सरशिप है. ट्विटर इंडिया में बीबीसी की डॉक्टयूमेन्ट्री से जुड़ा मेरा वो ट्वीट हटा दिया है, जिसके लाखों लोग देख चुके थे. एक घंटे की ये डॉक्टयूमेन्ट्री ये खुलासा करती है कि प्रधानमंत्री अल्पसंख्यकों से नफरत करते हैं.”

उन्होंने लिखा, “ऐसा करने (उनका ट्वीट डिलीट करने) के अजीब कारण दिए गए हैं. लेकिन विपक्ष ये लड़ाई लड़ता रहेगा.”

तृणमूल कांग्रेस की महुआ मोइत्रा ने भी ट्वीट कर कहा कि सरकार हर हाल में यह सुनिश्चित करना चाहती है कि एक भी आदमी इस डॉक्यूमेंट्री को नहीं देखे.

अख़बार लिखता है कि इस डॉक्टयूमेन्ट्री से जुड़े विवाद के बीच 300 से अधिक जानेमाने लोगों ने बीबीसी के ख़िलाफ़ एक पत्र लिखकर कहा है कि ये डॉक्टयूमेन्ट्री भारत की छवि ख़राब करने की कोशिश है.

इसमें 13 रिटायर्ट जज, 133 रिटायर्ड नौकरशाह, 33 राजदूत और सशस्त्र बल के 156 अधिकारी शामिल हैं.

इस पत्र में उन्होंने बीबीसी को ब्रितानी शासन के दौर की याद दिलाई है और कहा है कि ये “ये दुष्प्रचार का एक हिस्सा है. इसमें पूर्वाग्रह, निष्पक्षता की कमी और औपनिवेशिक मानसिकता को दिखाता है.”

बीबीसी ने दो एपिसोड की एक डॉक्यूमेंट्री बनाई है जिसका नाम है – ‘इंडिया: द मोदी क्वेश्चन’. इसका पहला एपिसोड 17 जनवरी को ब्रिटेन में प्रसारित हो चुका है. अगला एपिसोड 24 जनवरी को प्रसारित होने जा रहा है.

पहले एपिसोड में नरेंद्र मोदी के शुरुआती राजनीतिक करियर को दिखाया गया है जिसमें वे भारतीय जनता पार्टी में आगे बढ़ते हुए, गुजरात के मुख्यमंत्री के पद पर पहुँचते हैं.

शनिवार को देश के चीफ़ जस्टिस डीवाई चंद्रचूड़ ने 1973 के कोर्ट के एक फ़ैसले को ‘अभूतपूर्व’ बताया और कहा कि संविधान को समझने और उसे लागू करने के मामले में ये फ़ैसला एक ‘नॉर्थ स्टार’ (ध्रुव तारे) की तरह जजों को रास्ता दिखाता है.

इससे दस दिन पहले उप-राष्ट्रपति जगदीप धनखड़ ने सुप्रीम कोर्ट की आलोचना करते हुए कहा था कि 1973 के फ़ैसले के साथ उसने एक ग़लत उदाहरण पेश किया है.

बॉम्बे बार एसोसिएशन द्वारा आयोजित 18वें पालखीवाला मेमोरियल लेक्चर में चीफ़ जस्टिस ने कहा कि बदलते वक्त में जज संविधान में लिखी बातों की व्याख्या करते हैं और केशवानंद भारती मामले में दिया गया फ़ैसला भारतीय संविधान की आत्मा को बनाए रखने में मदद करता है.

अख़बार लिखता है कि चीफ़ जस्टिस ने कहा, “जब आगे का रास्ता जटिल होता है उस वक्त हमारे संविधान की मूल संरचना एक ध्रुव तारे की तरह इसकी व्याख्या करने वालों और इसका कार्यान्वयन करने वालों को एक दिशा देता है और उनका मार्गदर्शन करता है. संविधान के मूल स्वरूप या उसके दर्शन में संविधान को सर्वोच्च जगह दी गई है. इसमें क़ानून के शासन, शक्ति के बंटवारे, क़ानून की समीक्षा, धर्मनिरपेक्षता, संघीय ढांचे, हर इंसान को आज़ादी और सम्मान के साथ-साथ राष्ट्र एकता और अखंडता की बात की गई है.”

चीफ़ जस्टिस ने कहा कि 1973 का फ़ैसला “सफलता ही ऐसी दुर्लभ कहानी है” जिसका भारत के पड़ोसी मुल्कों नेपाल, बांग्लादेश और पाकिस्तान ने भी अनुकरण किया.

इंडियन एक्सप्रेस ने भी इस ख़बर को पहले पन्ने पर जगह दी है. जाने माने वकील नानी पालखीवाला ने 13 जजों की बेंच के सामने केशवानंद भारती मामले की पैरवी की थी.

‘केशवानंद भारती बनाम स्टेट ऑफ़ केरल’ मामले में सुप्रीम कोर्ट ने कहा था कि ‘संविधान की प्रस्तावना के मूल ढांचे को बदला नहीं जा सकता’ यानी संविधान में संशोधन किया जा सकता है, लेकिन इसकी मूल संरचना में नहीं. इस फ़ैसले के कारण केशवानंद भारती ‘संविधान का रक्षक’ भी कहा जाता था.

दस दिन पहले उप राष्ट्रपति जगदीप धनखड़ ने कहा था कि इस फ़ैसले ने ग़लत मिसाल पेश की है और अगर कोई भी संस्था संविधान में संशोधन करने की संसद की शक्ति पर सवाल उठाती है, तो यह कहना मुश्किल होगा कि ‘हम एक लोकतांत्रिक राष्ट्र हैं.’

कर्नाटक में चिक्की या केला नहीं, अंडे हैं 80 फ़ीसदी बच्चों की पसंद

भारत के दक्षिणी राज्य कर्नाटक में मिडडे मील योजना में अंडे देना राजनीतिक पार्टियों और धार्मिक नेताओं के बीच चर्चा का विषय बना हुआ है. लेकिन इस मामले में बच्चों की राय से ये स्पष्ट हुआ है कि वो अपने भोजन में अंडे शामिल करना चाहते हैं.

बीते साल दिसंबर की 14 तारीख तक के डिपार्टमेन्ट ऑफ़ पब्लिक इन्स्ट्रक्शन के आंकड़ों के मुताबिक़ सरकारी स्कूलों में कक्षा एक से लेकर कक्षा आठ तक क़रीब 47.97 बच्चे पढ़ाई करते हैं.

इनमें से 38.37 लाख बच्चों ने कहा है कि वो अपने खाने में अंडे लेना पसंद करेंगे, वहीं 3.37 लाख बच्चों ने केले लेना और 2.27 लाख बच्चों ने चिक्की लेने तो तरजीह दी है. जिस दौरान बच्चों की राय ली जा रही थी उस दौरान कुछ स्कूलों में अनुपस्थित भी थे.

जुलाई 2022 में हुई एक पायलट स्टडी में सामने आया था कि बच्चों के भोजन में अंडा शामिल करने के सकारात्मक नतीजे आए हैं. इसके बाद स्कूल शिक्षा विभाग ने कहा कि अतिरिक्त पोषण कार्यक्रम के तहत कक्षा एक से आठ तक के बच्चे मिडडे मील में पके भोजन के साथ अंडा, केला या चिक्की में से कोई एक विकल्प चुन सकते हैं.

विभाग के अनुसार प्रधानमंत्री पोषण शक्ति निर्माण (मिडडे मील) कार्यक्रम के तहत मौजूदा अकादमिक वर्ष 2022-23 में राज्य के सभी जिले के स्कूलों में एक साल में 46 दिन बच्चों को अतिरिक्त पोषण दिया जाना है.

कुश्ती संघ के असिस्टेंट सेक्रेटरी निलंबित

खिलाड़ियों के साथ चर्चा कर उनका धरना ख़त्म करने और कुश्ती महासंघ के अध्यक्ष बृजभूषण शरण सिंह को जांच पूरी होने तक संघ के काम से अलग रहने के लिए बोलने के बाद केंद्रीय खेल मंत्री अनुराग ठाकुर ने संघ के असिस्टेंट सेक्रेटरी विनोद तोमर तुरंत प्रभाव से को निलंबित कर दिया है.

खेल मंत्री ने गोंडा में हो रहे सीनियर नेशनल ओपन रैंकिंग कुश्ती प्रतियोगिता को भी रद्द कर दिया है. बृजभूषण शरण सिंह के बतौर ‘गेस्ट’ शामिल होने की तस्वीरें और वीडियो सामने आने के बाद उन्होंने ये फ़ैसला लिया है.

बृजभूषण सिंह गोंदा के नंदिनी नगर स्टेडियम में हो रहे इस टूर्नामेंन्ट में शिरकत करने पहुंचे थे, हालांकि इस दौरान वो किसी तरह का बयान देने से बचने नज़र आए.

खेल मंत्री के आश्वासन पर तीन दिन बाद दिल्ली के जंतर मंतर पर हो रहा धरना प्रदर्शन ख़त्म करने के बाद कुश्ती संघ के ख़िलाड़ियों ने इन तस्वीरों पर नाराज़गी जताई. खेल मंत्री ने कहा था कि जब तक जांच कमिटी अपनी रिपोर्ट नहीं सौंप देती तब तक बृजभूषण सिंह संघ के रोज़मर्रा के कामकाज से दूरी बनाए रखेंगे.

अनुराग ठाकुर ने अख़बार से कहा कि विनोद तोमर ने एक समाचार एजेंसी को दिए इंटरव्यू में बृजभूषण सिंह पर महिला कुश्ती पहलवानों के लगाए आरोपों का खंडन किया था और उन आरोपों को बेबुनियाद करार दिया था.

अनुराग ठाकुर ने कहा कि स्पॉन्सरशिप के ज़रिए मिले पैसों में धोखाधड़ी के आरोप में भी तोमर को निलंबित किया गया है. उन्होंने कहा कि वो खिलाड़ियों के साथ हैं और तोमर की भूमिका की भी जांच की जाएगी.

दिल्ली में धरना देने के दौरान पहलवान विनेश फोगाट ने बृजभूषण सिंह पर महिला खिलाड़ियों के यौन उत्पीड़न का आरोप लगाया था. उन्होंने ये भी कहा था कि बृजभूषण सिंह खिलाड़ियों के निजी जीवन में दखलअंदाज़ी करते हैं.

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